बुधवार, 15 अप्रैल 2009

मधुमेह : परिचय और नियंत्रण

Madhumeh : Parichay aur Niyantran

मधुमेह
को दो श्रेणियों में बांटा गया है; टाइप-1 और टाइप-2.

डाईबिटीज़ मैलीटस टाइप-1 -- इसे जन्मजात या आनुवंशिक कारणों कारणों से होने वाला मधुमेह (इंसुलिन निर्भर मधुमेह) भी कहा जाता है; टाइप-1 मधुमेह क्यों होता है, इसका पूरा पता मेडिकल साइंस अभी तक नहीं लगा पाया है. इस प्रकार के मधुमेह में इंसुलिन का बनना या तो एकदम कम हो जाता है या फिर पूरी तरह बंद हो जाता है. इसका कारण है की शारीर की रोगप्रतिरोधक प्रणाली इंसुलिन पैदा करने वाली पाचक ग्रंथि की कोशिकाओं पर हमला कर उन्हें ख़त्म कर देती है, जिससे की इंसुलिन बनना कम हो जाता है या रुक जाता है.

डाईबिटीज़ मैलीटस टाइप-2 -- इसे व्यस्क अवस्था में होने वाला, या मोटापे से संबंधित मधुमेह भी कहा जाता है, इसे इंसुलिन अ-निर्भर मधुमेह (Non Insulin Dependent Diabetes Mellitus) के नाम से भी जाना जाता है, टाइप-2 मधुमेह में इंसुलिन पैदा करने वाली कोशिकाएं रक्त शर्करा के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं. जैसे जैसे
समस्या बढती जाती है, इंसुलिन का उत्पादन शरीर में कम होता जाता है.

गर्भावस्था में होने वाला मधुमेह (गेस्टेस्नल डाईबिटीज़): इसे अक्सर टाइप-3 डाईबिटीज़ भी कहा जाता है, हलाँकि डॉक्टर टाइप-3 शब्द का प्रयोग नहीं करते. इस प्रकार का मधुमेह महिलाओं में गर्भावस्था में देखने में आता है, इसके लक्षण और कारण टाइप-2 मधुमेह जैसे ही होते हैं, यानी यह इंसुलिन के प्रति कोशिकाओं के
असंवेदनशील होने के कारण होता है. इसके परिणामस्वरुप पेट में शिशु का वज़न असामान्य रूप से बढ़ा हुआ महसूस होना, प्रसूति के बाद शिशु को घातक पीलिया और रक्त शर्करा की कम मात्रा जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
बहुत कम मामलों में में गर्भस्थ शिशु की मौत भी होती देखी गई है.

मधुमेह का प्रकार कोई भी हो, इसमें मरीज़ के रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है. इस असामान्यता का कारण इंसुलिन की कमी होना या इसका
ज़रूरत से ज्यादा स्राव होना है. अगर सही तरीके से इलाज न किया जाए तो मरीज़ में कई जटिलताएं जन्म ले सकती हैं (जैसे की दिल का दौरा, हाथ या पैर में सड़न हो जाना, अंधापन, और नपुंसकता).

मधुमेह के लक्षण : इस बीमारी की शुरुआत इसके प्रकार पर निर्भर करती है. टाइप-2 के अधिकतर केसों में लक्षण धीरे धीरे प्रगट होते हैं, बीमारी सामने आते आते कुछ साल बीत जाते हैं . हालांकि, टाइप-1 केसों में धीमी शुरुआत होती है, खासकर बच्चों में, पर लक्षण तेजी से सामने आते हैं, मात्र कुछ सप्ताह या महीनों में ही.

मधुमेह के प्रारंभिक लक्षण हैं:

*बार बार प्यास लगना
*
बार बार पेशाब
जाना
* तेजी से वजन घटना
*
बहुत ज्यादा भूख लगना
*
बिना किसी खास वजह के ही कमजोरी या थकन महसूस होना

मधुमेह का पता कैसे लगाया जाता है?: मधुमेह के निदान की कई विधियां हैं, पर चिकित्सक कुछ ही विधियों को प्रयोग में लाते हैं.

* स्वस्थ्य की जांच
* उच्च रक्त शर्करा की जांच
* मधुमेह से सम्बंधित नए लक्षण और चिन्हों की पहचान

मधुमेह की जांच अक्सर इसके लक्षण दिखने के बाद ही की जाती है. मरीजों को पहले एक डाईबिटीज़ जांच से गुज़रना होता है, जिसका विवरण और विधि अलग अलग देशों वहां की चिकित्सा निति के अनुसार भिन्न हो सकती है. कुछ मरीजों को रेंडम ग्लूकोज़ टेस्ट, फास्टिंग ग्लूकोज़ व इंसुलिन, या 75 ग्राम ग्लूकोज़ लेने के दो घंटे बाद ग्लूकोज़ लेना होता है. कभी कभी डॉक्टर औपचारिक रूप से ग्लूकोज़ टोलरेंस टेस्ट द्वारा भी मधुमेह का पता लगाते हैं.


४० से ५० की आयु के भारतीय या दक्षिण एशियाई मूल के लोगों को अपना मधुमेह परीक्षण अवश्य करा लेना चाहिए. यह जांच उनके लिए और भी ज़रूरी है जिन्हें मोटापे की समस्या है, परिवार में कोई और भी मधुमेह से पीड़ित है.

मधुमेह का जोखिम किन चीज़ों से बढ़ सकता है?

मधुमेह का जोखिम बढ़ने वाले बहुत से कारक हो सकते हैं, और ये अगर मिल जाएं तो डाईबिटीज़ मैलीटस होने की संभावना बढ़ा देती हैं. हालांकि, मधुमेह का असली
कारण किसी को भी पूरी तरह नहीं पता है. नीचे दिए गए कारण मधुमेह का जोखिम बढ़ाने वाले माने जाते हैं.

मोटापा -- मधुमेह के सबसे खतरनाक कारणों में से एक है मोटापा. डाईबिटीज़ टाइप-2 ज्यादातर उन्ही लोगों में देखने में आता है जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएम्आर) 25 से ज्यादा हो, इससे वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला की वजन नियंत्रण में रखना मधुमेह की रोकधाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.


कमर का घेरा -- एक और कारक जो थोड़ा-बहुत मोटापे से ही सम्बंधित है. वैज्ञानिक शोध बताते हैं की कमर का घेरा मधुमेह की मोटापे से भी ज्यादा अच्छी तरह भविष्यवाणी कर सकता है. जिन लोगों में चर्बी पेट और कमर में ज्यादा होती है (सेब के आकर का शरीर) उन्हें मधुमेह होने की संभावना ज्यादा होती है. जिनकी चर्बी जांघों, नितम्बों एवं कूल्हों में जमा होती है वे लोग मधुमेह के शिकार कम बनते हैं (नाशपाती के आकार का शरीर).

शारीरिक श्रम न करना -- कसरत का वजन और कमर के घेरे से सीधा सम्बन्ध है. तो, शारीरिक श्रम की कमी भी मधुमेह का खतरा बढ़ा देती है.

आयु -- हालांकि कुछ प्रकार के मधुमेह बच्चों में भी देखने में आते हैं, पर जैसे जैसे इन्सान की उम्र बढती जाती है मधुमेह का खतरा भी बढ़ता चला जाता है. ४० वर्ष की आयु में अधिकतर मरीजों में मधुमेह का पता चलता है.

पारिवारिक पृष्ठभूमि -- इसमें पारिवारिक इतिहास एवं नस्ल शामिल हैं. वैज्ञानिक मधुमेह और आनुवंशिकी में कोई सीधा सम्बन्ध अभी तक नहीं खोज सके हैं, पर वैज्ञानिक अध्ययनों में पता चला है की अगर आपके परिवार में किसी को मधुमेह हो तो आपको भी यह बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है. और जहाँ तक नस्ल की बात है, मधुमेह ज्यादातर आफ्रो-अमेरिकन, लैटिन-अमरीकी, रेड-इंडियन एवं दक्षिण एशियाई लोगों में ज्यादा देखने में आता है.

मधुमेह से बचाव के उपाय:

स्वस्थ जीवनशैली मधुमेह की रोकधाम में मदद कर सकती है. अगर आपके परिवार में मधुमेह आनुवंशिक रूप से मौजूद हो तो भी, आहार में उचित बदलाव और व्यायाम द्वारा इसे रोकने में मदद मिल सकती है. अगर आप पहले से ही मधुमेह से पीड़ित हैं, यही जीवनशैली में सुधार आपको इस बीमारी की संभावित जटिलताओं से बचा सकता है.

  • स्वस्थ आहार: कम चर्बी (Fat) एवं कम कैलोरी वाला आहार चुनें. फल, सब्जियां और अनाज की मात्रा भोजन में ज्यादा रखें. खाने में नियमित रूप से बदलाव करते रहें, जिससे की बोरियत महसूस न हो.
  • शारीरिक परिश्रम बढा दें: प्रतिदिन कम से कम ३० मिनट हल्का व्यायाम करने का लक्ष्य बनाएं. सबेरे टहलने निकल जाएं, साइकिल चलाएं, बागवानी करें. अगर आप लगातार व्यायाम नहीं कर सकते, तो इसे पूरे दिन में कई हिस्सों में बांट लें.
  • वज़न कम करें: अगर आपका वज़न अधिक है तो कुछ किलो भार कम करना भी मधुमेह के खतरे को काफी कम कर सकता है. अपना वज़न नियंत्रण में रखें, अपनी खाने और व्यायाम की आदतों में में स्थाई परिवर्तन लाने का प्रयास करें. घटे हुए वज़न से लाभ जैसे की स्वस्थ्य ह्रदय, बढ़ी हुई मानसिक एवं शारीरिक उर्जा अपना आत्मविश्वास के बारे में जानने से आप अपना मनोबल स्थाई रूप से बढ़ाए रख सकते हैं.

जीवनशैली और घरेलू-उपाय


  • अपनी मधुमेह की समस्या से निबटने के लिए कमर कस लें: मधुमेह के विषय में जितना जान सकें, जहाँ से भी जान सकें, जानने का प्रयास करें. स्वास्थ्यवर्धक आहार और व्यायाम को दैनिक जीवन का अंग बना लें. ऐसे लोगों से दोस्ती बढाएं जो आपको मधूमेह के विषय में कुछ और जानकारी दे सकते हों. जब भी ज़रूरत पड़े अपने डॉक्टर से संपर्क साधने में देर न करें.

  • पहचान चिन्ह साथ रखें: कोई बाजूबंद, लॉकेट या आसानी से दिखने वाला कोई पहचान चिन्ह --- जिसमे आपके मधुमेह के विषय में जानकारी हो --- हमेशा साथ रखें. अपनी ग्लुकगोन किट हमेशा पास रखें जिससे की आपात स्थिति में आपकी रक्त शर्करा को नियंत्रित किया जा सके --- अपने मित्रों एवं परिवार के सदस्यों को इसके उपयोग की जानकारी दे दें.
  • साल में कम से कम एक बार आंखों एवं स्वास्थ्य की जांच कराएं: आपकी नियमित डाईबीटीज़ जांच कभी भी स्वस्थ्य की पूरी जांच और आंखों की नियमित जांच की जगह नहीं ले सकती. शारीर की पूरी जांच में डॉक्टर अन्य स्वस्थ्य संबंधी जांच के आलावा मधुमेह से संबंधित समस्याओं को ढूंढने का प्रयास करेंगे. आंखों के डॉक्टर रेटिना संबंधी किसी क्षती, मोतियाबिन्द और ग्लूकोमा की जांच करेंगे.
  • टीके समय पर लगवाते रहें: उच्च रक्त शर्करा आपकी रोगप्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर कर सकती है. हर दस साल में एक बार टिटेनस बूस्टर टीका ज़रूर लगवाएं. डॉक्टर आपको निमोनिया वेक्सीन या अन्य टीकों की सलाह भी दे सकते हैं.
  • दांतों की सुरक्षा: मधुमेह के कारण आपके मसूड़ों के संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है. दांतों की दिन में दो बार ब्रश से सफाई करें. साल में एक बार डेंटिस्ट से जांच कराएं. अगर आपके मसूड़ों में सूजन या लाली है या उनसे खून आ रहा हो तो तुंरत दंतचिकित्सक से संपर्क करें.
  • पैरों का ध्यान रखें: पैरों को रोज़ गुनगुने पानी से धोएं. उन्हें नर्म तौलिये से सुखाएं, खासकर अंगुलियों के बीच, और उनमें मोइश्चराइज़र या कोल्ड क्रीम लगाएं. प्रतिदिन फफोलों, कटने, घाव, सूजन और लाली की जांच करें. ऐसी कोई समस्या अगर कुछ दिनों ठीक न हो तो अपने डॉक्टर डॉक्टर से संपर्क करें.
  • अपना रक्तचाप और कोलेस्ट्रोल नियंत्रण में रखें. स्वास्थ्यवर्धक आहार एवं नियमित व्यायाम से रक्तचाप और कोलेस्ट्रोल नियंत्रित रहते हैं. कई मामलों में दवाईयों की भी ज़रूरत पड़ सकती है.
  • अगर आप धुम्रपान करते हैं या किसी और रूप में तम्बाकू का सेवन करते हैं, तो यह आदत छोड़ने के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें. धुम्रपान से मधुमेह संबंधित कई समस्याएँ पैदा हो सकती हैं, जैसे दिल का दौरा, नसों और तंत्रिकाओं में समस्या और गुर्दों से संबंधित रोग. वास्तव में, अमेरिकन डाईबेटीज़ एसोसिएशन के अनुसार, धुम्रपान करने वाले मधुमेह रोगीयों की दिल की बीमारी से मौत की संभावना धुम्रपान न करने वाले मधुमेह रोगीयों से तीन गुना अधिक होती है. धुम्रपान अथवा तम्बाकू संबंधी अन्य आदतों को छोड़ने के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें.
  • अगर आप शराब पीते हैं, तो ज़िम्मेदारी से पिएं. अल्कोहल रक्त शर्करा बढा या घटा सकती है, निर्भर करता है की आप कितना पीते हैं या पीने के साथ साथ कितना खाते हैं. अगर आप पीना ही चाहें तो, कम मात्रा में पिएं और भोजन के साथ पिएं. याद रखिए, अल्कोहल की कैलोरी भी आपके मोटापे में योगदान देती है.
तनाव से सावधान रहें: अगर आप तनाव में हैं तो आसानी से मधुमेह नियंत्रण की दैनिक गतिविधियों से आपका ध्यान हट सकता है. काफी समय से चले आ रहे तनाव से उत्पन्न होने वाले हारमोन इंसुलिन की कार्यप्रणाली में बाधा डालते हैं. जिससे की बात और बिगड़ जाती है. इसे नियंत्रित करने के लिए कुछ सीमाएं तय करें. साथ ही अपनी प्राथमिकताएँ तय करें. प्राणायाम की सरल तकनीकें सीखें और गहरी पूरी नींद लें.


और आखिर में सबसे महत्वपूर्ण बात,

सकारात्मक सोचें. मधुमेह एक गंभीर समस्या है, पर इसे नियंत्रित किया जा सकता है. अगर आप अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रहे हैं तो आप मधुमेह के साथ भी एक सक्रिय एवं स्वस्थ जीवन जी सकते हैं.


3 टिप्‍पणियां:

  1. स्वागतम!

    हिन्दी में स्वास्थ्य विषयक जानकारी का बहुत अभाव है। कहते हैंकि रोगी को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने एवं रोगों के विषय में शिक्षा से बहुत लाभ होता है। यदि सरल और सुप्तवाह भाषा में आम जनता के समझने लायक लेख मिलें तो जनता को बहुत लाभ होगा। आप से यही आशा है।

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  2. प्रिय बन्धु
    खुशामदीद
    स्वागतम
    हमारी बिरादरी में शामिल होने पर बधाई
    मेरी सबसे बड़ी चिंता ये है कि आज हमारे समाज का शैक्षिक पतन उरूज पर है पढना तो जैसे लोग भूल चुके हैं और जब तक आप पढेंगे नहीं, आप अच्छा लिख भी नहीं पाएंगे अतः सिर्फ एक निवेदन --अगर आप एक घंटा ब्लॉग पर लिखाई करिए तो दो घंटे ब्लागों कि पढाई भी करिए .शुभकामनाये
    जय हिंद

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  3. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं ............
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ

    ये मेरे ख्वाब की दुनिया नहीं सही, लेकिन
    अब आ गया हूं तो दो दिन क़याम करता चलूं
    -(बकौल मूल शायर)

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